11 मार्च 2023

Jay Ma Meenakshi

 🚩Jay Ma Meenakshi 🚩

🏵️  जय मां मीनाक्षी  🏵️



चलिये आज मीनाक्षी मन्दिर किंवा, मीनाक्षी अम्मां मन्दिर  जहाँ भगवान शिव और मां मीनाक्षी (पार्वती ) की विवाह हुआ था।



भारत की तमिलनाडु राज्य में मदुरई नगर, में स्थित ये एक भव्य ऐतिहासिक मन्दिर है। भगवान शिव एवं  देवी पार्वती  (मीनाक्षी यानी  मछली आकार की आंख वाली देवी के रूप में) समर्पित ये मंदिर अत्यधिक सुन्दर मनोरम है।

 


ध्यान देने योग्य बात ये है कि मछली पांड्य राजा लोगो की  राजचिह्न था।ये मन्दिर तमिल भाषा की गृहस्थान 2500 वर्ष पुरानी मदुरई नगर की जीवनरेखा माना जाता है ।


कांची तु कामाक्षी, मदुरै मिनाक्षी,

दक्षिणे कन्याकुमारी ममः शक्ति रूपेण भगवती,

नमो नमः नमो नमः।।

💐इस मन्दिर का स्थापत्य एवं वास्तु आश्चर्यचकित कर देने वाला है, जिस कारण यह आधुनिक विश्व के सात आश्चर्यों की सूची में प्रथम स्थान पर स्थित है, एवं इसका कारण इसका विस्मयकारक स्थापत्य ही है।

इस इमारत समूह में 12 भव्य गोपुरम हैं, जो अतीव विस्तृत रूप से शिल्पित हैं।


💐पौराणिक कथा

हिन्दू आलेखों के अनुसार, भगवान शिव पृथ्वी पर सुन्दरेश्वरर के रूप में स्वयं देवी पार्वती अर्थात् मीनाक्षी से विवाह रचाने अवतरित हुए थे। देवी पार्वती ने पूर्व में पाँड्य राजा मलयध्वज, मदुरई के राजा की घोर तपस्या के फलस्वरूप उनके घर में एक पुत्री के रूप में अवतार लिया था।  वयस्क होने पर उसने नगर का शासन संभाला। तब भगवान आये और उनसे विवाह प्रस्ताव रखा, जो उन्होंने स्वीकार कर लिया। इस विवाह को विश्व की सबसे बडी़ घटना माना गया, जिसमें लगभग पूरी पृथ्वी के लोग मदुरई में एकत्र हुए थे। भगवान विष्णु स्वयं, अपने निवास बैकुण्ठ से इस विवाह का संचालन करने आये। ईश्वरीय लीला अनुसार इन्द्र के कारण उनको रास्ते में विलम्ब हो गया। इस बीच विवाह कार्य स्थानीय देवता कूडल अझघ्अर द्वारा संचालित किया गया। बाद में क्रोधित भगवान विष्णु आये और उन्होंने मदुरई शहर में कदापि ना आने की प्रतिज्ञा की। और वे नगर की सीमा से लगे एक सुन्दर पर्वत अलगार कोइल में बस गये। बाद में उन्हें अन्य देवताओं द्वारा मनाया गया, एवं उन्होंने मीनाक्षी-सुन्दरेश्वरर का पाणिग्रहण कराया।


💐यह विवाह एवं भगवान विष्णु को शांत कर मनाना, दोनों को ही मदुरई के सबसे बडे़ त्यौहार के रूप में मनाया जाता है, जिसे चितिरई तिरुविझा  या अझकर तिरुविझा, यानि सुन्दर ईश्वर का त्यौहार ।


इस दिव्य युगल द्वारा नगर पर बहुत समय तक शासन किया गया। यह वर्णित नहीं है, कि उस स्थान का उनके जाने के बाद्, क्या हुआ? यह भी मना जाता है, कि इन्द्र को भगवान शिव की मूर्ति शिवलिंग रूप में मिली और उन्होंने मूल मन्दिर बनवाया। इस प्रथा को आज भी मन्दिर में पालन किया जाता है ― त्यौहार की शोभायात्रा में इन्द्र के वाहन को भी स्थान मिलता है।



💐आधुनिक इतिहास

आधुनिक ढांचे का इतिहास सही सही अभी ज्ञात नहीं है, किन्तु तमिल साहित्य के अनुसार, कुछ शताब्दियों पहले का बताया जाता है। तिरुज्ञानसंबन्दर, प्रसिद्ध हिन्दू शैव मतावलम्बी संत ने इस मन्दिर को आरम्भिक सातवीं शती का बताया है औरिन भगवान को आलवइ इरैवान कह है। इस मन्दिर में मुस्लिम शासक मलिक कफूर ने 1310 में खूब लूटपाट की थी। और इसके प्राचीन घटकों को नष्ट कर दिया। फिर इसके पुनर्निर्माण का उत्तरदायित्व आर्य नाथ मुदलियार (1559-1600 A.D.), मदुरई के प्रथम नायक के प्रधानमन्त्री, ने उठाया। वे ही 'पोलिगर प्रणाली' के संस्थापक थे। फिर तिरुमलय नायक, लगभग 1623 से 1659 का सर्वाधिक मूल्यवान योगदान हुआ। उन्होंने मन्दिर के वसंत मण्डप के निर्माण में उल्लेखनीय उत्साह दिखाया


💐मन्दिर का ढाँचा

इस मन्दिर का गर्भगृह 3500 वर्ष पुराना  है, इसकी बाहरी दीवारें और अन्य बाहरी निर्माण लगभग 1500-2000 वर्ष पुराने  हैं। इस पूरे मन्दिर का भवन समूह लगभग 45 एकड़ भूमि में बना है, जिसमें मुख्य मन्दिर भारी भरकम निर्माण है और उसकी लम्बाई 254मी एवं चौडा़ई 237 मी है। मन्दिर बारह विशाल गोपुरमों से घिरा है, जो कि उसकी दो परिसीमा भीत (चार दीवारी) में बने हैं। इनमें दक्षिण द्वार का गोपुरम सर्वोच्च है।

🙏जय मां मीनाक्षी  , जय बाबा भोलेनाथ 🙏🌺जय हो विष्‍णु 🌺🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

सेंधा नमक के बारे में जानकारी

 सेंधा नमक भारत से कैसे गायब कर दिया गया, शरीर के लिए Best Alkalizer है.... आप सोच रहे होंगे की ये सेंधा नमक बनता कैसे है ?? आइये आज हम आपको...