25 फ़रवरी 2023

mahalakshmi

  mahalakshmi ashtakam

चेन्नई के महालक्ष्मी-अष्टलक्ष्मी 




महालक्ष्मी 'ऊँ' के आकार वाली ओर 'इ' अष्टलक्ष्मी के  दरबार है, जहाँ दर्शन मात्र दे दुःख दूर हो जाते है,माँ अष्टलक्ष्मी  अपनी आठों  रुप में विराजमान है यहाँ ।  अष्टलक्ष्मी (लक्ष्मी क आठ रूप) मंदिर हैं। देवी लक्ष्मी के आठ रूप आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, आ विजयलक्ष्मी है।



अष्टलक्ष्मी की दर्शन से ही धन, विद्या, वैभव, शक्ति ओर सुख की प्राप्ति हो जाते है।

 अपनी संस्मरण ओर अन्य स्त्रोत  से सब कुछ पा सकते है ।।

भारत में देवी लक्ष्मी के कई मंदिरें हैं, उनमें से चेन्नई के अडयार में स्थित महालक्ष्मी का मंदिर सबसे खास है। इस मंदिर में देवी लक्ष्मी के 8 स्वरूपों की प्रतीमा स्थापित है। इस मंदिर को 'माता अष्टलक्ष्मी मंदिर' के नाम से जाना जाता है।


इस मंदिर की विशेषता यहां पर विराजमान माता लक्ष्मी के 8 स्वरूप है। यह मंदिर अष्टलक्ष्मी के नाम से विख्यात है। मान्यता है कि यहां अष्टलक्ष्मी के दर्शन से धन, विद्या, वैभव, शक्ति व सुख की प्राप्ति होती है। यह मंदिर विशाल गुंबद वाला है। मंदिर में देवी लक्ष्मी की 8 प्रतिमाएं भिन्न-भिन्न तल पर स्थापित हैं।


यहां आनेवाले भक्तों को आदि लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, धैर्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी, विजया लक्ष्मी, संतना लक्ष्मी व धन लक्ष्मी के दर्शन होते हैं। इस मंदिर के अंत में भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का प्रतिमा है। यहां आनेवाले श्रद्धालु इस मंदिर के दर्शन किए बिना नहीं वापस नहीं जाते हैं।               


8 कमल पुष्प अर्पित करने की है प्रथा


 हम सभी जानते हैं कि देवी लक्ष्मी को कमल का पुष्प अति प्रिय है। यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालु माता को कमल का पुष्प जरूर अर्पित करते हैं। इस मंदिर में 8 कमल पुष्प अर्पित करते हैं क्योंकि इस मंदिर में माता लक्ष्मी 8 स्वरूपों में विराजमान है। यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालु भिन्न-भिन्न कमल के पुष्प लेकर आते हैं।    अष्टलक्ष्मी मंदिर एक हिंदू मंदिर है, जो भारत के चेन्नई में इलियट के समुद्र तट (बसंत नगर बीच) के पास स्थित है। मंदिर देवी लक्ष्मी और उनके आठ प्राथमिक रूपों को समर्पित है। गर्भगृहों को एक बहु-स्तरीय परिसर में इस तरह से चित्रित किया गया है कि आगंतुक किसी भी गर्भगृह में कदम रखे बिना सभी मंदिरों में जा सकते हैं।


मंदिर का निर्माण कांची मठ के श्री चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती स्वामी की इच्छा पर किया गया था। मंदिर का अभिषेक 5 अप्रैल 1976 को अहोबिला मठ के 44 वें गुरु वेदांत ढेसिका यतीन्द्र महाधेसिकन स्वामी की उपस्थिति में हुआ था।


मंदिर परिसर में ही श्री गणेश, श्री हनुमान का अंजनेय रूप, चिकित्सा के देवता धन्वंतरि, महालक्ष्मी एवं महाविष्णु उपस्थित हैं, साथ ही साथ मंदिर के सामने पवित्र जल श्रोत के रूप में स्वयं विशाल सागर बंगाल की खाड़ी विद्यमान है।


मंदिर के शन्तिमय वातावरण में समुद्र की गूंजती हुई लहरें, तथा मंदिर के दूसरे फ्लोर से समुद्र दर्शन माँ लक्ष्मी के भक्तों को और भी रोमांचित कर देता है। मंदिर मे पूजा, प्रसाद एवं धार्मिक पुस्तकों की प्राप्ति हेतु मंदिर में एक दुकान भी उपलब्ध है।


पौराणिक कथा:


ऐसा माना जाता है कि देवी लक्ष्मी से विवाह करने वाले महाविष्णु ने भी देवी लक्ष्मी के आठ रूपों से विवाह किया था और वे एक साथ मंदिर के अंदर रहते हैं। इसलिए नाम है अष्टलक्ष्मी (लक्ष्मी के आठ रूप) मंदिर। देवी लक्ष्मी के आठ रूप आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी और विद्यालक्ष्मी। मंदिर की लंबाई 65 फीट और चौड़ाई 45 फीट है।


त्यौहार:

वरलक्ष्मी पूजा, नवरात्रि इस मंदिर का मुख्य त्यौहार है, जो हर साल भव्य तरीके से मनाया जाता है।


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