gangeswar mahadev mandir
श्री गंगेश्वर मंदिर
गंगेश्वर महादेब गुजरात के दीव शहर से लगभग 3 किलोमीटर दूर फदुम गांव में स्थित है। ये मंदिर को गुजरात का सबसे प्राचीन शिव मंदिर में से एक माना जाता है ।। मंदिर पूर्ण रूप से भगवान शिव की है।
श्री गंगेश्वर मंदिर: जहाँ हर दू तीन सेकंड में शिव लिंग समुन्द्र-माँ गंगा की जल में डूब जाती है । ये रोचक सत्य का विस्तृत जानकारी :-
श्री गंगेश्वर महादेव मंदिर को भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है जो कि भगवान शिव को समर्पित है।
भारत में ऐसे कई मंदिर हैं जिनका इतिहास सदियों पुराना है। कोई मंदिर रामायण काल में बना तो कोई मंदिर कृष्णा काल में। सदियों से हिंदुस्तान की धरती ऐसे कई प्राचीन मदिरों की साक्षी रही है। आज भी भारत के कोने-कोने में एक से एक प्राचीन देवी-देवताओं के अद्भुत मंदिर देखने को मिल जाएंगे। इन्हीं प्राचीन मंदिरों में से एक है श्री गंगेश्वर महादेव और इस मंदिर का 'शिव लिंग'। इस शिव लिंग के दर्शन करने के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं और इस मंदिर के प्रांगण में पूजा-पाठ करते हैं। समुन्द्र तट के चट्टानों पर स्थापित है ये शिव लिंग। हर दो सेकंड में शिव लिंग से जब समुन्द्र की लहरे टकराती हैं तो इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है।
ऐसा माना जाता है कि ये मंदिर लगभग 5000 साल पुरानी है, और इस मंदिर का निर्माण और शिव लिंग की स्थापना महाभारतकाल में पांडवों द्वारा किए गए थे। इस मंदिर में पांच शिव लिंग है जो हर दो सेकंड में समुद्र की लहरें शिव लिंग से टकराती हैं और फिर ये लहरें वापिस समुद्र में मिल जाती हैं। इस मंदिर के आसपास का वातावातावरण इतना शांत है कि जब भी कोई इस मंदिर के प्रांगण में प्रवेश करता है तो उसे समुद्र की लहरों की आवाज साफ-साफ सुनाई देती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब पांचों पांडव अपने निर्वासन अर्थात् वनवास में थे, तो उसी बीच इस मंदिर का निर्माण किया था। ये भी कहा जाता है कि पांचों पांडव यहां हर रोज भगवान शिव की पूजा करने आते थे। गंगेश्वर मंदिर में शिव रात्रि का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। सावन के महीने में भी यहां लाखों श्रद्धालु महोदव के दर्शन के लिए आते हैं।
इस मदिर में पांच शिव लिंग होने के कारण यह मंदिर 'पंच शिव लिंग' के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर को 'सीशोर मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है। नाम को लेकर ये भी मान्यता है कि गंगेश्वर भगवान शिव का एक नाम है जो गंगा माता को अपनी जटा से घारण करने पर मिला, इसलिए इस मंदिर को गंगेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
इस मदिर में पांच शिव लिंग हैं इसलिए यह मंदिर 'पंच शिव लिंग' के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर को 'सीशोर मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है। नाम को लेकर ये भी मान्यता है कि गंगेश्वर भगवान शिव का एक नाम है जो गंगा माता को अपनी जटा से घारण करने पर मिला इसलिए इस मंदिर को गंगेश्वर मंदिर के नाम से भी जाता हेै।
gangeswar mahadev




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